अपने नैनिहालों को अच्छे स्कूल में नामांकन करवाने के लिए इस समय अभिभावक एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।हालात ऐसे हैं कि यदि किसी कान्वेन्ट या नामी पब्लिक स्कूल में बच्चे का नामांकन नही हुआ तो अभिभावकों लगता है कि उनसे बड़ा बदनशीब कोई नही होगा आज स्कूल हमारा स्टेटस सिम्बल हो गया है। स्कूल व्यवसायी भी अभिभावकों के इस मनोदशा का भरपूर लाभ उठा रहे हैं और उनसे मनमाफिक पैसे ले कर पालकों को गुमराह करते हैं। इस सारभौमिक सत्य के साथ कि कोई किसी को कुछ सीखा नही सकता, पब्लिक स्कूलों के बड़े बड़े दावे समझ से परे हैं।यह बात अभिभावकों को समझना होगा कि बच्चों के सीखने में इन स्कूल्स का योगदान 10% से ज्यादा नही है जबकि इनके द्वारा बच्चे की प्रकृति में जो छेड़छाड़ होता है उससे होने वाला नुकसान इससे कई गुना ज्यादा है।अपने पोस्ट के माध्यम से मैं आपलोगों को सीखने के क्षेत्र में हो रहे नये शोध कार्यों को साझा करना चाहता हूँ जिससे आप सीखाने के नाम पर हो रहे गोरखधंधो को समझ सकें और स्कूलों द्वारा हो रही मनमानी से बच सकें।
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