अभी हाल ही में मुझे सेवाग्राम (वर्धा) में नई तालीम समिति के तत्वावधान में आयोजित शिक्षा विषयक सम्मेलन में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ।ये वही जगह है जहाँ से गाँधी जी ने बुनियादी शिक्षा की बात कही और शिक्षा का उद्देश्य 3H अर्थात Head, Heart and Hand का विकास बताया।नई शिक्षा नीति के लिए सुझाव से संबंधित मसौदा बनाने के क्रम में मेरी मुलाकात केरल से आए श्री अरुण एलेस्सरीन जी से हुई जिन्होंने शिक्षा से सम्बन्धित प्रयोग अपने ऊपर ही किया। उनकी 1बेटी और 2बेटे हैं जो स्कूल नही जाते या यूँ कहे वे उन्हें घर पर ही पढ़ने और सीखने का माहौल उपलब्ध कराते हैं।उनके अनुभव में हमारी शिक्षा व्यवस्था में जो 16 साल की स्कूलिंग है वो समय का दुरुपयोग है वे मानते थे कि इन 16 सालों में जो बच्चे सीखते हैं वो मुश्किल से 8 वर्ष लायक भी नही है, साथ ही इस दौरान बहुत सारी ऐसी बातें सिखाई जाती हैं जिनका हम पुरे जीवन काल में कभी उपयोग नही करते।ऐसे में ये समय और श्रम का बहुत बड़ा दुरपयोग है।इस वार्तालाप ने मेरे मन में कई प्रश्न उत्पन्न किए जो मैं अपने अगले पोस्ट में शेयर करूँगा।
प्रभाकर पाण्डेय
सहायक प्राध्यापक
वैकल्पिक शिक्षा केंद्र (साँची विश्वविद्यालय)
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